हिंद स्वराष्ट्र सूरजपुर : “किसी को इतना भी न सताओ साहब की वो आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाएं…” यह महज एक जुमला नहीं, बल्कि सूरजपुर जिले की एक बेबस और अकेली महिला की वो चीख है, जो व्यवस्था के बहरे कानों तक पहुंचने का रास्ता ढूंढ रही है। जिले में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने शासन, पुलिस प्रशासन और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के इस मामले में प्रशासनिक निष्क्रियता के चलते अब पीड़िता न्याय की उम्मीद छोड़ मौत को गले लगाने जैसी स्थिति में पहुंच गई है।
SP ऑफिस के सामने आरोपी खोल रहा दुकान, पुलिस को दिख रहा ‘फरार’
मामले के अनुसार, कलेक्ट्रेट कार्यालय जहां SP कार्यालय भी हैं उसके ठीक सामने दुकान चलाने वाले एक छोटे कारोबारी प्रदीप गुप्ता उर्फ प्रदीप अग्रहरि पर एक महिला ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। कड़ी मशक्कत और कई पापड़ बेलने के बाद आखिरकार बीते 12 मई को पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध तो पंजीबद्ध कर लिया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी को ‘फरार’ बताया जा रहा है, जबकि स्थानीय सूत्रों के अनुसार वह SP ऑफिस के सामने ही अपनी दुकान पर बेखौफ बैठ रहा है।
हॉस्टल अधीक्षिका पत्नी पर पद के दुरुपयोग का आरोप
इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब आरोपी कारोबारी की पत्नी, जो कि शासकीय विभाग में हॉस्टल अधीक्षिका के पद पर तैनात हैं, द्वारा अपने पद और प्रभाव का धौंस दिखाने की बात सामने आई। आरोप है कि अधीक्षिका ने पीड़िता के साथ-साथ कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों को भी चमकाने और धमकी देने का प्रयास किया, जिससे मामले को दबाया जा सके।
सोशल मीडिया पर चरित्र हनन, व्हाट्सएप ग्रुप में भी परोसी गई खबर
आरोपी की हिम्मत यहीं नहीं रुकी। ‘फरारी’ के दौरान ही उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पीड़िता के चरित्र पर कीचड़ उछालना शुरू कर दिया। आरोपी ने अपनी आईडी से महिला के संवेदनशील पहचान पत्र (दस्तावेजों) और तस्वीरों को सार्वजनिक करते हुए फेसबुक ग्रुप्स में अपशब्द लिखे और भ्रामक बातें फैलाईं।
हद तो तब हो गई जब इस घिनौने खेल में तथाकथित पत्रकारिता का भी सहारा लिया गया। एक कथित पत्रकार के माध्यम से क्षेत्र में चल रहे देह व्यापार से जोड़कर एक भ्रामक खबर प्रायोजित कराई गई। इस खबर में महिला के निजी दस्तावेजों की तस्वीरों को सरेआम लगा दिया गया।
सबसे बड़ा सवालिया निशान: इस बदनाम करने वाली खबर को व्हाट्सएप के उस ग्रुप में भी शेयर किया गया, जिसमें सूरजपुर जिले के तमाम आला अधिकारी, प्रशासनिक अमला और जिम्मेदार लोग मौजूद हैं। लेकिन अत्यंत निंदनीय है कि किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इस पर संज्ञान लेना उचित नहीं समझा। अधिकारियों की इस मूक सहमति या अनदेखी के कारण महिला की इज्जत सरेआम नीलाम होती रही।
व्यवस्था से उठेगा भरोसा, तो कौन होगा जिम्मेदार?
यह मामला साफ तौर पर दर्शाता है कि जब रक्षक ही मूकदर्शक बन जाएं, तो भक्षक के हौसले कितने बुलंद हो जाते हैं। एक तरफ सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ सूरजपुर की यह घटना उन दावों को खोखला साबित कर रही है।
पीड़ित महिला और उसका परिवार इस भ्रामक और बदनाम करने वाली साजिश से मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है। अब सवाल यह उठता है कि क्या सूरजपुर का शासन और पुलिस प्रशासन इस बेबस महिला को समय पर न्याय दिला पाएगा, या फिर व्यवस्था की यह सुस्ती किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है?



