हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर/मैनपाट: छत्तीसगढ़ के शिमला के रूप में विख्यात मैनपाट की हसीन वादियों में अब ‘भू-माफिया’ रूपी सरकारी तंत्र की काली नजर लग चुकी है। शासन जिस मैनपाट को पर्यटन के मानचित्र पर चमकाने का प्रयास कर रहा है, वहीं व्यवस्था के रक्षक ही भक्षक बनकर गरीबों को उजाड़ने पर आमादा हैं। ताजा मामला मैनपाट के अमगांव का है, जहाँ एक रसूखदार नायब तहसीलदार ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक असहाय बुजुर्ग महिला की बेशकीमती जमीन पर डकैती डाली है।
कुटरचित दस्तावेजों का खेल: तहसीलदार और आरआई की मिलीभगत
सरगुजा कलेक्टर द्वारा कराई गई उच्च स्तरीय जांच में इस काले कारनामे का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, नायब तहसीलदार संजीत पाण्डेय ने नियम-कानूनों को ताक पर रखकर, राजस्व निरीक्षक (RI) मार्टिन एक्का के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों का मायाजाल बुना। पद की मर्यादा को कलंकित करते हुए पाण्डेय ने उक्त विवादित जमीन के फर्जी दस्तावेज अपने पुत्र अचिंत्य पाण्डेय के नाम पर तैयार करवाए। सरकारी कलम की ताकत का ऐसा नग्न प्रदर्शन किया गया कि रातों-रात कागजों में हेरफेर कर बुजुर्ग महिला की जमीन पर कब्जा जमा लिया गया और वहां बाउंड्री वॉल व नलकूप खनन जैसे अवैध निर्माण कार्य भी कर लिए गए।
साजिश और दमन: पहले जमीन लूटी, फिर जेल भेजने की धमकी दी
नायब तहसीलदार की निर्दयता यहीं नहीं रुकी। आरोप है कि जब पीड़ित बुजुर्ग दंपत्ति ने अपनी जमीन बचाने की कोशिश की, तो उन्हें डराने-धमकाने के लिए संजीत पाण्डेय ने पुलिस और प्रशासन का भय दिखाया। गरीब बुजुर्गों को फर्जी तरीके से ‘वृक्षों की कटाई’ के मामले में फंसा दिया गया ताकि वे कानूनी कार्रवाई के डर से चुप बैठ जाएं। एक जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी अपराधियों की तरह बुजुर्गों को अन्य झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दे रहा है।
कलेक्टर की जांच में पुष्टि, अब कार्रवाई का इंतजार
पीड़ित महिला की जनदर्शन में की गई शिकायत ने इस पूरे भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। कलेक्टर की जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि नायब तहसीलदार ने पद का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी की है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन अपने ही विभाग के इस ‘भ्रष्ट अधिकारी’ पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करेगा या कागजी खानापूर्ति कर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?

मैनपाट की जनता में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि न्याय की रक्षा करने वाले ही जमीन हड़पने लगेंगे, तो गरीब और बेसहारा लोग न्याय की गुहार किसके सामने लगाएंगे?



