SDM मैडम के रसूख के आगे नतमस्तक हुआ सिस्टम! करोड़ों डकारने वाले डॉ. आयुष जायसवाल को किसका संरक्षण?

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हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर (सरगुजा): क्या छत्तीसगढ़ में कानून केवल आम आदमी के लिए है? क्या सरकारी खजाना लूटने वालों के पास अगर ‘पावरफुल’ कनेक्शन हो, तो उनके लिए जांच रिपोर्ट महज एक रद्दी का टुकड़ा है? सरगुजा जिले के नवापारा शहरी स्वास्थ्य केंद्र में हुए करोड़ों के दवा घोटाले ने प्रशासन की नीयत पर कालिख पोत दी है।
जांच में भ्रष्टाचार के सबूत ‘पहाड़’ जैसे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर प्रशासन ‘मौन व्रत’ धारण किए बैठा है। आखिर क्यों? क्या इसलिए कि मुख्य आरोपी डॉ. आयुष जायसवाल क्षेत्र की एक रसूखदार एसडीएम (SDM) के पति हैं?


जांच रिपोर्ट में ‘पाप’ साबित, फिर भी साहब ‘साफ’!
CMHO को सौंपी गई आधिकारिक रिपोर्ट चीख-चीख कर कह रही है कि दवाओं और उपकरणों के नाम पर सरकारी पैसे की बंदरबांट हुई है।
सबूतों की चिता जलाई गई:  पुरानी फाइलों को आग लगाकर यह समझ लिया गया कि पाप धुल गए।
अंधी लूट: बिना रेट तय किए, बिना टेंडर के चहेते सप्लायरों को करोड़ों के ऑर्डर बांट दिए गए।
कीमोथेरेपी में भी खेल: कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की दवाओं में भी भ्रष्टाचार करने से डॉ. आयुष जायसवाल और उनके साथियों का दिल नहीं कांपा।
अधिकारी चुप हैं या डरे हुए हैं?
हैरानी की बात है कि जांच रिपोर्ट आए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन कलेक्टर से लेकर स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी फाइलों पर कुंडली मारकर बैठे हैं। जनता पूछ रही है— क्या प्रशासनिक अधिकारियों की नैतिकता किसी के पति होने के नाते गिरवी रखी जा चुकी है? अगर आरोपी कोई आम क्लर्क होता तो अब तक सलाखों के पीछे होता, लेकिन यहाँ ‘मैडम’ के रसूख ने पूरे सिस्टम को लकवा मार दिया है।


शर्मनाक: गरीबों की दवा के पैसों से ऐश!
एक तरफ गरीब जनता अस्पतालों में दवाइयों के लिए भटकती है, और दूसरी तरफ अधिकारी और उनके रसूखदार परिजन करोड़ों का गबन कर चैन की नींद सो रहे हैं। अगर इस रिपोर्ट के बाद भी FIR दर्ज नहीं होती है, तो यह माना जाएगा कि सरगुजा प्रशासन भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बना चुका है।
सवाल जो प्रशासन को चुभेंगे:
1. क्या जांच समिति की रिपोर्ट केवल दिखावा थी?
2. क्या कलेक्टर और CMHO पर ऊपर से दबाव है कि ‘SDM पति’ का बाल भी बांका न हो?
3. सबूत जलाने के बाद भी अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?

चेतावनी

जिला प्रशासन याद रखे, फाइलें दबाई जा सकती हैं, लेकिन जनता की आवाज नहीं। यह खबर तब तक थमेगी नहीं, जब तक गरीबों का हक डकारने वाले डॉ. आयुष जायसवाल और उनके सहयोगी सलाखों के पीछे नहीं पहुंच जाते।

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