हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर/सीतापुर : सीतापुर से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाण पत्र की वैधता अब कानूनी घेरे में है। जनजाति सुरक्षा मंच का आरोप है कि विधायक का प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरुआत से ही संदिग्ध रही है और इसमें कई गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।
जिला संयोजक, जनजाति सुरक्षा मंच बिहारी लाल तिर्की के अनुसार, विधायक का जाति प्रमाण पत्र 19 सितंबर 2023 को एसडीएम कार्यालय, लैलूंगा से जारी किया गया था। इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने
अक्टूबर 2023: जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति, रायगढ़ में पहली शिकायत दर्ज कराई।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप: विधानसभा चुनाव की आहट को देखते हुए मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ले जाया गया (रिट याचिका क्रमांक 4587/2023)।
वर्ष 2026 की नई याचिका: लंबे समय तक ठोस कार्रवाई न होने के कारण वर्ष 2026 में पुनः याचिका दायर की गई हैं।
न्यायालय का सख्त रुख: 90 दिनों का अल्टीमेटम
मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने 2 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायालय ने संबंधित छानबीन समिति को निर्देशित किया है कि इस पूरे प्रकरण की जांच 90 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण की जाए।
“हाईकोर्ट के इस आदेश से आम जनता का न्यायपालिका पर भरोसा और सुदृढ़ होगा। यह संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है।” — बिहारी लाल तिर्की, जिला संयोजक, जनजाति सुरक्षा मंच
गोपनीयता और साक्ष्य संकलन
तिर्की ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए सभी तथ्यों को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। इस कानूनी लड़ाई में अधिवक्ता ऋषिराज सिंह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिन्होंने दस्तावेजों के संकलन और तकनीकी पक्षों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष रखा है।
डॉ. आंबेडकर जयंती पर संदेश
संयोगवश, इस घटनाक्रम की जानकारी बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर सार्वजनिक की गई। मंच का कहना है कि वे केवल संवैधानिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना चाहते हैं ताकि आरक्षित वर्गों के अधिकारों का हनन न हो।
90 दिनों की इस समय सीमा के भीतर आने वाली रिपोर्ट विधायक रामकुमार टोप्पो के राजनीतिक भविष्य और उनकी सदस्यता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।



