अहिंसा के अवतार: भगवान महावीर और उनके प्रासंगिक विचार…

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हिंद स्वराष्ट्र, महावीर जयंती विशेष : आज जब विश्व अशांति, हिंसा और असहिष्णुता के दौर से गुजर रहा है, तब जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के सिद्धांत पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के दिन मनाया जाने वाला महावीर जयंती का पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मानवता को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की याद दिलाने वाला दिन है।
महावीर का जीवन दर्शन
कुंडलपुर (बिहार) के राजसी वैभव को त्याग कर सत्य की खोज में निकलने वाले वर्द्धमान ने 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद ‘केवल ज्ञान’ प्राप्त किया। उन्होंने दुनिया को यह सिखाया कि विजय शस्त्रों से नहीं, बल्कि स्वयं की इंद्रियों और विकारों को जीतने से मिलती है। इसीलिए उन्हें ‘महावीर’ कहा गया।
पंचशील सिद्धांत: सुखी जीवन का आधार
भगवान महावीर ने पांच मूलभूत सिद्धांतों की शिक्षा दी, जो आज के आधुनिक समाज की कई समस्याओं का समाधान हैं:
अहिंसा (Non-violence): केवल शारीरिक चोट न पहुँचाना ही अहिंसा नहीं है, बल्कि मन और वाणी से भी किसी का बुरा न सोचना अहिंसा है। ‘जियो और जीने दो’ का उनका संदेश वैश्विक शांति का मूल मंत्र है।
सत्य (Truth): कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ न छोड़ना।
अस्तेय (Non-stealing): किसी दूसरे की वस्तु पर अधिकार न जताना।
ब्रह्मचर्य (Chastity): संयम और पवित्रता का पालन करना।
अपरिग्रह (Non-attachment): आवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संग्रह न करना। यह सिद्धांत आज के उपभोक्तावादी युग में मानसिक शांति और पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
अनेकांतवाद: वैचारिक उदारता
महावीर स्वामी का ‘अनेकांतवाद’ का सिद्धांत सिखाता है कि सत्य के कई पहलू हो सकते हैं। दूसरों के दृष्टिकोण का सम्मान करना और मतभेदों को संवाद से सुलझाना ही इस दर्शन का सार है। यदि आज का समाज इसे अपना ले, तो वैचारिक मतभेद और संघर्ष समाप्त हो सकते हैं।
आज के संदर्भ में महत्व
महावीर जयंती हमें आत्म-निरीक्षण का अवसर देती है। यह दिन हमें संकल्प लेने के लिए प्रेरित करता है कि हम न केवल जीव मात्र के प्रति दया भाव रखें, बल्कि पर्यावरण के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी समझें। उनके अनुसार, “मित्ती मे सव्व भूएसु” अर्थात् सभी जीवों के साथ मेरी मित्रता हो।
निष्कर्ष:
भगवान महावीर के विचार किसी एक धर्म या संप्रदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए हैं। उनकी जयंती मनाना तभी सार्थक होगा जब हम उनके बताए अहिंसा और करुणा के मार्ग पर एक कदम आगे बढ़ाएं।

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