हिंद स्वराष्ट्र अंबिकापुर : सरगुजा पुलिस ने ऑनलाइन सट्टे के खिलाफ चल रहे अभियान में एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने सट्टा गिरोह के फरार मुख्य सरगना आयुष सिन्हा उर्फ दीप सिन्हा को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया आरोपी पिछले काफी समय से फरार चल रहा था और पुलिस की आंखों में धूल झोंककर ठिकाने बदल रहा था।
फर्जी खातों के जरिए होता था करोड़ों का खेल
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी दीप सिन्हा और उसके साथियों ने मिलकर लगभग 300 फर्जी बैंक खाते खुलवाए थे। इन खातों का उपयोग क्रिकेट मैच और अन्य खेलों में सट्टे के पैसों के लेनदेन के लिए किया जाता था। जांच के दौरान इन खातों में करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन होने के साक्ष्य मिले हैं। आरोपी कमीशन का लालच देकर भोले-भाले लोगों के आधार कार्ड, एटीएम और चेक बुक का इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए करते थे।
पुणे से दबोचा गया मास्टरमाइंड
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार अग्रवाल (IPS) के निर्देश और नगर पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल (IPS) के नेतृत्व में साइबर सेल और कोतवाली पुलिस की एक संयुक्त टीम गठित की गई थी। पुलिस टीम ने तकनीकी विश्लेषण और जमीनी सूचनाओं के आधार पर आरोपी का पीछा किया और अंततः उसे पुणे (महाराष्ट्र) से हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 13 मई 2024 का है, जब कोतवाली पुलिस ने आईपीएल मैच (GT vs KKR) के दौरान ऑनलाइन सट्टा खिलाते हुए अमित मिश्रा और शुभम केशरी को रंगे हाथों पकड़ा था। उस दौरान दीप सिन्हा पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब रहा था।
पुलिस ने इनके पास से:
* 19 मोबाइल फोन (आईफोन-15 सहित)
* 21 एटीएम कार्ड
* 03 पासबुक और 02 चेकबुक
* नगद राशि और सट्टे का हिसाब-किताब बरामद किया था।
कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई
शुरुआत में यह मामला जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत दर्ज था, लेकिन जांच में फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के सबूत मिलने पर पुलिस ने इसमें धारा 467, 468, 471, 120 (बी) और आईटी एक्ट की धारा 66(सी), 66(डी) भी जोड़ दी है। इस मामले में पूर्व में भी ऋतिक मंदिलवार, नितिन यादव और ध्रुवील पटेल समेत कई अन्य आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है।
इनकी रही मुख्य भूमिका
इस सफल कार्रवाई में नगर पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल, कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक शशिकान्त सिन्हा, साइबर सेल प्रभारी एएसआई अजीत मिश्रा, प्रधान आरक्षक भोजराज पासवान, विकास सिन्हा और आरक्षक मनीष सिंह की सराहनीय भूमिका रही।

