हिरासत में मौत पर बवाल : आखिर बलरामपुर पुलिस किस राज को छुपाने कर रही इतनी मशक्कत…??

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हिंद स्वराष्ट्र बलरामपुर : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के दहेजवार चौक स्थित धनंजय ज्वेलर्स चोरी मामले में पुलिस हिरासत में लिए गए एक आरोपी उमेश सिंह की कथित तौर पर अस्पताल में मौत होने के बाद सोमवार को बलरामपुर में जमकर हंगामा हुआ। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर पिटाई से मौत का गंभीर आरोप लगाया है, जबकि पुलिस इसे बीमारी से हुई मौत बता रही है।


क्या है मामला?
पुलिस ने धनंजय ज्वेलर्स चोरी मामले में 9 आरोपियों को पकड़ा था, जिनमें से 8 को रविवार को जेल भेज दिया गया। इसी मामले में हिरासत में लिए गए उमेश सिंह की रविवार सुबह 4.30 बजे अस्पताल में मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि उमेश को सिकलसेल की बीमारी थी और गिरफ्तारी के बाद तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई।


परिजनों का आरोप और हंगामा
मृतक उमेश की मां और अन्य परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उमेश को 7 नवंबर को घर से उठाया था और अंबिकापुर व बलरामपुर थाने में उसके साथ बुरी तरह मारपीट की गई, जिससे उसकी मौत हुई। साथ ही जब पुलिस ने उमेश सिंह के बीमार होने और बलरामपुर अस्पताल में भर्ती होने की सूचना दी, तब परिजन उससे मिलने के लिए बलरामपुर आ रहे थे। तब परिजनों का आरोप है कि उन्हें रास्ते में पस्ता थाने में रोक लिया गया। उन्हें लगभग 2 घंटे तक पस्ता थाने में रोके रखा गया। इसके बाद बलरामपुर से एक महिला पुलिस अधिकारी पस्ता थाना पहुंचीं, जिसके बाद उन्हें बलरामपुर जाने दिया गया।

परिजनों को बलरामपुर जाने से रोका गया था, जिसके कारण वे समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाए और उनके पहुँचने से पहले ही उमेश का पोस्टमार्टम शुरू हो चुका था।
यह घटनाक्रम परिजनों के इस आरोप को बल देता है कि पुलिस मामले को छिपाने और कार्रवाई को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थी।


शव लेने से इनकार

परिजनों को रास्ते में रोका गया और उनके अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृतक का पोस्टमार्टम कर दिया गया जिससे परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने शव लेने से इंकार कर दिया। परिजन दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने और दोबारा पोस्टमार्टम की मांग पर अड़े रहे और शव लेने से इनकार कर दिया।


सड़क पर प्रदर्शन

परिजनों ने थाने के सामने सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। विवाद और प्रदर्शन के बीच, सोमवार दोपहर को पुलिस ने कथित तौर पर परिजनों की सहमति के बिना, जबरन एंबुलेंस से उमेश का शव उसके गांव भिजवा दिया। जब परिजनों ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए थाने के सामने प्रदर्शन किया, तो पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए उन पर लाठीचार्ज किया। खबर है कि इस दौरान मृतक के कुछ परिजनों को पुलिस ने अस्पताल परिसर में बंधक भी बना लिया था।

पुलिस द्वारा मृतक के शव को जबरन उसके गृह ग्राम में भेजने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि जब मृतक के परिजन बलरामपुर में थे तो पुलिस ने शव को जबरन क्यों भेजा..?  सबसे बड़ा सवाल जब परिजन थे ही नहीं तब शव को मृतक के गृह ग्राम में किसके पास भेजा गया था..?
पुलिस प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन एएसपी विश्व दीपक त्रिपाठी ने मृतक को बीमार बताया है। 
यह मामला अब क्षेत्र में तनाव का माहौल पैदा कर रहा है और पुलिस हिरासत में हुई मौत ने पुलिस विभाग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। पुलिस की यह कार्य प्रणाली कई सवाल खड़े कर रही हैं। पुलिस का काम कानून की रखवाली करना है तो पुलिस कानून को अपने हाथ में लेकर क्यों काम कर रही है..?

पुलिस की अब तक के कार्यवाही जो सवालों के घेरे में है

1. पुलिस द्वारा नौ आरोपियों की गिरफ्तारी करना और केवल आठ आरोपियों के गिरफ्तारी की प्रेस विज्ञप्ति जारी करना।

2. युवक की तबीयत खराब होने की जानकारी देना और बलरामपुर आते हुए परिजनों को पस्ता थाने में 2 घंटे बैठाना।

3. परिजनों की अनुपस्थिति में मृतक का पोस्टमार्टम करवाना।

4. दोबारा पोस्टमार्टम और दोषियों के विरुद्ध  FIR की मांग कर रहे परिजनों पर लाठी चार्ज करना।

5. परिजनों के विरोध के बावजूद जबरन परिजनों की अनुपस्थिति में मृतक के शव को उसके गृह ग्राम भिजवाना।

एक के बाद एक पुलिस द्वारा की जा रही है नियम विरुद्ध कार्यवाही पुलिस पर ही सवालिया निशान लगा रही हैं। सूत्रों की माने तो पुलिस किसी बात को छुपाने की कोशिश कर रही है यह मामला सिर्फ एक जगह हुई चोरी की घटना का मामला नहीं था। सूत्र बताते हैं कि चोरों का यह समूह चोरों का बहुत बड़ा गिरोह हैं और इसमें कई बड़े ज्वेलर्स भी शामिल हैं और इस गिरोह का मास्टरमाइंड अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस द्वारा उस मास्टरमाइंड को ही बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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