छत्तीसगढ़ साड़ी घोटाला: गुणवत्ता और माप में बड़ी धांधली, मंत्री मंत्रालय छोड़ छट्टी बड़ी में व्यस्त और विभाग धांधली में मस्त…

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हिंद स्वराष्ट्र अम्बिकापुर : छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास विभाग एवं समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े काफी सामाजिक महिला है और मंत्रालय छोड़ अधिकतर समय छट्टी–बड़ी और शादी पार्टी के कार्यक्रमों में व्यस्त रहती हैं। मंत्री मैडम के बारे में क्या ही कहें सूरजपुर जिले के अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को संरक्षण देने का कार्य मैडम द्वारा बखूबी किया जा रहा है, थाना तक पहुंचने वाले मामलों में भी मैडम द्वारा अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर मामले में अपराधियों को संरक्षण देने का कार्य किया जाता है। उल्लेखनीय हैं कि लक्ष्मी राजवाड़े के कार्यकाल में इससे पहले भी विभाग में कई बड़े घोटाले हुए और अब साड़ियों की खरीदी और वितरण को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।

क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2024-25 के लिए प्रदेश की लगभग 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ियाँ वितरित की जानी थीं। इस खरीदी का जिम्मा खादी एवं ग्रामोद्योग को दिया गया था। लगभग 9.7 करोड़ रुपये के बजट से प्रति साड़ी ₹500 की दर पर साड़ियाँ खरीदी गईं। यह मामला तब गरमाया जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने साड़ियों की खराब गुणवत्ता और कम लंबाई की शिकायत करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वितरण के दौरान कार्यकर्ताओं ने साड़ियों में कई गड़बड़ियां पाईं:
लंबाई में कमी: वर्क ऑर्डर के अनुसार साड़ी की लंबाई 6.3 मीटर (5.5 मीटर साड़ी + 80 सेमी ब्लाउज) होनी चाहिए थी। लेकिन वास्तविकता में कई जिलों में साड़ियाँ महज 5 मीटर या 5.3 मीटर की निकलीं।
घटिया गुणवत्ता: कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जो साड़ी ₹500 में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, उसकी बाजार कीमत ₹200-250 से अधिक नहीं है।
धुलाई के बाद समस्या: पहली बार धोने के बाद ही साड़ियों का रंग उतरने लगा और कपड़ा बुरी तरह सिकुड़ गया, जिससे वे पहनने लायक नहीं रहीं।
इस मामले ने प्रदेश में राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।
विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे करोड़ों का भ्रष्टाचार करार दिया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
विभाग की मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने शिकायतों का संज्ञान लिया है। शुरुआती जांच के बाद विभाग ने ठेकेदारों का भुगतान रोक दिया है और मामले की गहराई से जांच के आदेश दिए हैं।
वर्तमान स्थिति
अगस्त 2025 से फरवरी 2026 के बीच हुए इस वितरण में अनियमितता पाए जाने के बाद अब साड़ियों को वापस लेने और दोषियों पर कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रायपुर सहित कई जिलों में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर इन साड़ियों को लौटाने की चेतावनी दी है। लेकिन यह कोई पहला मामला नहीं है जब विभाग में कोई बड़ा घोटाला किया हो इससे पहले भी इनके कार्यकाल में कई बड़े घोटाले हुए हैं और जिनकी जांच आज भी लंबित है।

1. रेडी-टू-ईट (RTE) वितरण और गुणवत्ता विवाद

​साड़ी विवाद से पहले, विभाग में रेडी-टू-ईट (कुपोषण दूर करने के लिए दिया जाने वाला पूरक पोषण आहार) की गुणवत्ता और इसके वितरण तंत्र को लेकर सवाल उठे थे।

  • शिकायतें: प्रदेश के कई आंगनबाड़ी केंद्रों से यह शिकायत आई थी कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को बांटे जाने वाले आहार की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं है।
  • विवाद: वितरण का काम निजी समूहों या सहकारी समितियों को देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के आरोप विपक्ष द्वारा लगाए गए थे।

2. मोबाइल फोन और टैबलेट खरीदी में धांधली के आरोप

​विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिए जाने वाले स्मार्टफोन और टैबलेट की खरीदी में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।

  • आरोप: यह दावा किया गया था कि पुरानी निविदाओं (Tenders) के आधार पर बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर उपकरणों की खरीदी की गई। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया था कि कम गुणवत्ता वाले उपकरण खरीदे गए, जो जल्द ही खराब हो गए।

3. आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण में भ्रष्टाचार

​छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण और मरम्मत के फंड के दुरुपयोग की खबरें सामने आई थीं।

  • मामला: कई स्थानों पर कागजों में भवन निर्माण पूर्ण दिखा दिया गया था, जबकि धरातल पर काम अधूरा था। इसके अलावा, भवनों के रंग-रोगन और सुविधाओं के नाम पर निकाली गई राशि में गबन की शिकायतें जिला स्तर पर दर्ज हुई थीं।

4. कार्यकर्ताओं की नियुक्तियों में अनियमितता

​विगत महीनों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया में भी स्थानीय स्तर पर भाई-भतीजावाद और पैसों के लेनदेन के आरोप लगे थे, जिसकी कई जिलों में जांच अभी भी जारी है।

प्रशासनिक विफलता या मौन सहमति?
महिला एवं बाल विकास विभाग, जिसकी जिम्मेदारी प्रदेश की सबसे संवेदनशील आबादी—महिलाओं और बच्चों—के संरक्षण की है, आज भ्रष्टाचार और लापरवाही का केंद्र बनता जा रहा है। साड़ी घोटाले से लेकर मोबाइल खरीदी और रेडी-टू-ईट की गुणवत्ता में आई गिरावट यह स्पष्ट करती है कि विभाग के भीतर निगरानी तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की भूमिका पर सवाल:
एक कैबिनेट मंत्री के रूप में यह लक्ष्मी राजवाड़े की जिम्मेदारी है कि करोड़ों रुपये के टेंडर और खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी हो। साड़ियों की लंबाई कम निकलना और घटिया कपड़े का वितरण सीधे तौर पर उनके विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच की सांठगांठ को दर्शाता है, जिसे रोकने में वह विफल रही हैं।
केवल ‘जांच’ का दिलासा

हर बार घोटाला उजागर होने के बाद मंत्री की ओर से “जांच की जाएगी” या “भुगतान रोक दिया गया है” जैसे रटे-रटाए बयान सामने आते हैं। सवाल यह है कि घोटाला होने ही क्यों दिया गया? क्या विभाग में भ्रष्टाचार मंत्री की नाक के नीचे पनप रहा है या उनकी प्रशासनिक ढिलाई का फायदा उठाया जा रहा है?

नैतिक जिम्मेदारी से दूरी

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं, जो जमीनी स्तर पर सरकार की योजनाओं को लागू करती हैं, उन्हें खराब गुणवत्ता का सामान देकर उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ किया गया है। विभाग की मुखिया होने के नाते लक्ष्मी राजवाड़े इस नैतिक पतन और वित्तीय अनियमितता की जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं।
प्रदेश की जनता और विपक्षी दल अब इसे केवल ‘अधिकारियों की गलती’ मानकर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। यदि मंत्री महोदया समय रहते अपने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार नहीं करतीं, तो इन घोटालों की आंच सीधे तौर पर उनकी राजनीतिक साख और कुर्सी तक पहुँचना तय है। यह विभाग अब ‘कल्याण’ के बजाय ‘विवादों’ का पर्याय बनता जा रहा है, जिसका सीधा जवाबदेही का केंद्र स्वयं विभागीय मंत्री हैं।

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